श्री केथावत सोमलाल का जीवनचरित्र: बंजारा भाषा, संस्कृति और लोक साहित्य के महान संरक्षक

श्री केथावत सोमलाल बंजारा (लंबाडी) समाज के प्रसिद्ध साहित्यकार, लोक कलाकार और भाषा संरक्षक हैं। उन्होंने बंजारा संस्कृति, लोकगीतों और भाषा के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। भगवद्गीता का लंबाडी भाषा में अनुवाद, बंजारा-तेलुगु पदकोश की रचना तथा समाज सेवा के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया।

Jul 14, 2026 - 12:44
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श्री केथावत सोमलाल का जीवनचरित्र: बंजारा भाषा, संस्कृति और लोक साहित्य के महान संरक्षक

भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत में बंजारा (लंबाडी) समाज की अपनी विशिष्ट पहचान है। इस समाज की भाषा, लोककला, लोकगीत और धार्मिक परंपराओं को संरक्षित रखने में जिन महान व्यक्तित्वों ने अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया, उनमें श्री केथावत सोमलाल का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है।

वे केवल एक लेखक या लोक कलाकार ही नहीं, बल्कि बंजारा भाषा, संस्कृति और साहित्य के सशक्त संवाहक, समाज सुधारक तथा प्रेरणादायी व्यक्तित्व हैं। उनके अथक प्रयासों से बंजारा समाज की सांस्कृतिक धरोहर को नई पहचान मिली और आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य साहित्य उपलब्ध हो सका। उनके इसी योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान से भी सम्मानित किया गया।

जन्म और प्रारंभिक जीवन

श्री केथावत सोमलाल का जन्म 8 अगस्त 1959 को तेलंगाना राज्य के वर्तमान यादाद्री भोंगीर जिले के अकुथोटा बावी थांडा नामक छोटे से गांव में एक साधारण एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में हुआ।

गरीबी में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपने जीवन का सबसे बड़ा साधन बनाया। कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और अपने ज्ञान तथा प्रतिभा के बल पर समाज में विशिष्ट स्थान बनाया।

शिक्षा

श्री सोमलाल ने उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद से उच्च शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने अनेक विषयों में अध्ययन कर निम्नलिखित डिग्रियां अर्जित कीं—

  • एम.ए. (MA)
  • एम.फिल. (M.Phil.)
  • बी.एड. (B.Ed.)
  • एल.एल.बी. (LLB)

उनकी बहुआयामी शिक्षा ने उन्हें साहित्य, समाज सेवा, संस्कृति संरक्षण और प्रशासनिक कार्यों में समान रूप से सक्षम बनाया।

बैंकिंग सेवा का सफल करियर

शिक्षा पूरी करने के बाद श्री सोमलाल ने भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India) में अपनी सेवाएं प्रारंभ कीं।

अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ईमानदारी और समर्पण के साथ बैंकिंग सेवा निभाई तथा उप प्रबंधक (Deputy Manager) के पद तक पहुंचे।

वर्ष 2013 में उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर अपना पूरा समय समाज, संस्कृति और भाषा संरक्षण के कार्यों को समर्पित कर दिया।

बंजारा लोक संस्कृति के संरक्षण का संकल्प

श्री सोमलाल ने अपना जीवन बंजारा समाज की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए समर्पित कर दिया।

उन्होंने विभिन्न तांडों का भ्रमण कर वहां के पारंपरिक लोकगीतों का संग्रह किया, उन्हें संकलित किया तथा मंचों पर प्रस्तुत किया।

उनके लोकगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं थे, बल्कि उनमें—

  • शिक्षा का महत्व
  • सामाजिक जागरूकता
  • समाज सुधार
  • सांस्कृतिक गौरव
  • नैतिक मूल्यों

का प्रभावशाली संदेश भी होता था।

उनकी प्रस्तुतियां आकाशवाणी (All India Radio) तथा दूरदर्शन पर भी प्रसारित हुईं, जिससे बंजारा संस्कृति देशभर तक पहुंची।

साहित्यिक योगदान

श्री केथावत सोमलाल ने बंजारा इतिहास और संस्कृति पर महत्वपूर्ण साहित्य का सृजन किया।

वर्ष 1986 में उन्होंने "थोली वेलुगु" नामक नाटक लिखा और प्रकाशित किया।

इसके बाद 1987 में उन्होंने आंध्र भूमि दैनिक समाचार पत्र में "कूलीलु पालेरलुगा मारिना ओकप्पाटि राजपुत्र लम्बाडीलु" शीर्षक से बंजारा समाज के इतिहास पर लेख प्रकाशित किया।

इन रचनाओं ने बंजारा समाज के इतिहास और सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

धार्मिक साहित्य और भक्ति गीत

श्री सोमलाल ने अनेक धार्मिक एवं प्रेरणादायक भक्ति गीतों की रचना और रिकॉर्डिंग भी की।

उन्होंने विशेष रूप से निम्न महान विभूतियों के जीवन पर आधारित गीत लिखे—

  • संत श्री सेवालाल महाराज
  • हाथीराम बावोजी
  • मेरामा माई
  • तुलजा भवानी
  • श्री वेंकटेश्वर स्वामी
  • भगवान हनुमान

इन गीतों ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ बंजारा समाज की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत किया।

बंजारा भाषा के संरक्षण में ऐतिहासिक योगदान

श्री केथावत सोमलाल का सबसे बड़ा योगदान बंजारा भाषा के संरक्षण में माना जाता है।

वर्ष 1990 में उन्होंने भगवद्गीता के 701 श्लोकों का लंबाडी (बंजारा) भाषा में अनुवाद करने का कठिन कार्य प्रारंभ किया।

उन्होंने इस पांडुलिपि को निःशुल्क प्रकाशन हेतु तिरुमला तिरुपति देवस्थानम् (TTD) को सौंप दिया।

लगातार 23 वर्षों के अथक प्रयासों के बाद वर्ष 2014 में बंजारा भगवद्गीता का ऐतिहासिक प्रकाशन हुआ।

इस ग्रंथ का लोकार्पण तिरुमला श्रीवारी ब्रह्मोत्सव के अवसर पर भारत के तत्कालीन सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एच.एल. दत्तू तथा न्यायमूर्ति एन.वी. रमणा द्वारा किया गया।

यह घटना बंजारा भाषा और साहित्य के इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जाती है।

बंजारा-तेलुगु शब्दकोश

बंजारा भाषा को विलुप्त होने से बचाने के उद्देश्य से श्री सोमलाल ने बंजारा-तेलुगु पदकोश (Dictionary) का निर्माण किया।

यह महत्वपूर्ण ग्रंथ तेलंगाना सरकार के जनजातीय कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2021 में प्रकाशित किया गया।

यह शब्दकोश बंजारा भाषा सीखने, शोध करने तथा नई पीढ़ी तक भाषा पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया।

सम्मान और पुरस्कार

श्री केथावत सोमलाल को कला, संस्कृति और समाज सेवा के क्षेत्र में अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए।

मुख्य सम्मान—

  • 2001 – बंजारा जनपद ब्रह्मा
  • 2006 – स्वर्ण कंकण सम्मान
  • 2013 – बंजारा कला रत्न
  • 2017 – उत्तम कलाकार पुरस्कार
  • 2017 – सर्वश्रेष्ठ लोक कलाकार पुरस्कार
  • 2020 – बंजारा रत्न
  • भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान

ये सम्मान उनके बहुआयामी योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति हैं।

समाज के लिए प्रेरणा

श्री केथावत सोमलाल ने यह सिद्ध किया कि सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ संकल्प, शिक्षा और समाज के प्रति समर्पण से असाधारण कार्य किए जा सकते हैं।

उन्होंने अपने लेखन, लोकगीतों, नाटकों, धार्मिक साहित्य और भाषा संरक्षण के माध्यम से बंजारा समाज की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

उपसंहार

श्री केथावत सोमलाल का जीवन बंजारा समाज के सांस्कृतिक पुनर्जागरण की प्रेरणादायक गाथा है। उन्होंने अपने ज्ञान, साहित्य, लोककला और सामाजिक सेवा के माध्यम से बंजारा भाषा और संस्कृति को संरक्षित रखने का जो महान कार्य किया है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

उनका जीवन हमें यह संदेश देता है कि अपनी मातृभाषा, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा केवल सरकारों का नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक जागरूक नागरिक का भी कर्तव्य है। श्री केथावत सोमलाल का योगदान भारतीय जनजातीय सांस्कृतिक इतिहास में सदैव सम्मान के साथ स्मरण किया जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों

श्री केथावत सोमलाल बंजारा (लंबाडी) समाज के प्रसिद्ध साहित्यकार, लोक कलाकार, समाजसेवी और बंजारा भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण के लिए समर्पित व्यक्तित्व हैं। उन्हें उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया।

उनका जन्म 8 अगस्त 1959 को तेलंगाना राज्य के यादाद्री भोंगीर जिले के अकुथोटा बावी थांडा में एक साधारण परिवार में हुआ।

उन्होंने बंजारा लोकगीतों का संग्रह किया, सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण किया, धार्मिक एवं सामाजिक जागरूकता से जुड़े गीत लिखे, भगवद्गीता का लंबाडी भाषा में अनुवाद किया तथा बंजारा-तेलुगु पदकोश का निर्माण किया।

बंजारा भगवद्गीता, भगवद्गीता के 701 श्लोकों का लंबाडी (बंजारा) भाषा में अनुवाद है। इसका अनुवाद श्री केथावत सोमलाल ने किया और इसका प्रकाशन वर्ष 2014 में तिरुमला तिरुपति देवस्थानम् (TTD) द्वारा किया गया।

उन्हें पद्मश्री, बंजारा जनपद ब्रह्मा, बंजारा कला रत्न, बंजारा रत्न, उत्तम कलाकार पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ लोक कलाकार पुरस्कार तथा स्वर्ण कंकण सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए।

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