डॉ. सुनील गुलाबसिंग जाधव का जीवन परिचय | साहित्यिक परिचय, पुस्तकें, पुरस्कार एवं कृतित्व

डॉ. सुनील गुलाबसिंग जाधव का जीवन परिचय, साहित्यिक यात्रा, शिक्षा, पुस्तकें, कविता, कहानी, नाटक, पुरस्कार, शोध कार्य एवं संपादन का विस्तृत परिचय।

Jul 20, 2026 - 11:26
0 10
डॉ. सुनील गुलाबसिंग जाधव का जीवन परिचय | साहित्यिक परिचय, पुस्तकें, पुरस्कार एवं कृतित्व

डॉ. सुनील गुलाबसिंग जाधव समकालीन हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित साहित्यकार, शोधकर्ता, नाटककार, कवि, कथाकार, समीक्षक, संपादक एवं शिक्षाविद् हैं। उन्होंने कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, एकांकी, शोध-समीक्षा, अनुवाद तथा संपादन जैसी अनेक साहित्यिक विधाओं में उल्लेखनीय योगदान दिया है। हिंदी साहित्य के साथ-साथ बंजारा समाज, दलित विमर्श तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर उनका लेखन विशेष रूप से चर्चित रहा है।

विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरिशस सहित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। पिछले 26 वर्षों से वे हिंदी अध्यापन के क्षेत्र में सक्रिय हैं तथा वर्ष 2015 से अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘शोध-ऋतु’ का संपादन कर रहे हैं।

संक्षिप्त परिचय

विवरण जानकारी
पूरा नाम डॉ. सुनील गुलाबसिंग जाधव
जन्म 1 सितंबर 1978 (शैक्षणिक अभिलेख), वास्तविक जन्म 9 सितंबर 1978
जन्म स्थान दुर्गा नगर टांडा, तहसील मुदखेड़, जिला नांदेड़, महाराष्ट्र
पिता श्री गुलाबसिंग जाधव
माता श्रीमती शकुंतलाबाई जाधव
पत्नी श्रीमती वैशाली जाधव
संतान तनिष्का एवं तन्मय
व्यवसाय हिंदी विभाग, यशवंत महाविद्यालय, नांदेड़ में प्राध्यापक एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका 'शोध-ऋतु' के संपादक
अनुभव 26 वर्ष अध्यापन

जन्म एवं प्रारंभिक जीवन

डॉ. सुनील गुलाबसिंग जाधव का वास्तविक जन्म 9 सितंबर 1978 को महाराष्ट्र के जिला नांदेड़ की मुदखेड़ तहसील स्थित दुर्गा नगर टांडा में एक बंजारा परिवार में हुआ। विद्यालय में प्रवेश के समय त्रुटिवश उनकी जन्मतिथि 1 सितंबर 1978 दर्ज हो गई, जो बाद में शैक्षणिक अभिलेखों में प्रचलित हो गई।

उनके पिता श्री गुलाबसिंग जाधव ने जिला उपनिबंधक सहकारी संस्था में क्लर्क के रूप में अपनी सेवा प्रारंभ की और अपनी मेहनत एवं कार्यकुशलता के बल पर सहकार न्यायालय में सी.ओ. (Co-operative Officer) पद तक पहुंचे। उनकी माता श्रीमती शकुंतलाबाई जाधव एक संस्कारवान गृहिणी हैं।

परिवार में चार भाई हैं—

  • अनिल
  • डॉ. सुनील
  • संदीप
  • राजू

इनमें डॉ. सुनील जाधव दूसरे पुत्र हैं।

शिक्षा-दीक्षा

डॉ. जाधव की प्रारंभिक शिक्षा पंचशील विद्यालय, हादगांव (महाराष्ट्र) में हुई।

पिता के स्थानांतरण के कारण परिवार आदिवासी क्षेत्र किनवट आ गया, जहाँ उन्होंने कॉस्मोपॉलिटन विद्यालय से माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की।

इसके पश्चात उन्होंने सरस्वती महाविद्यालय, किनवट से स्नातक एवं स्नातकोत्तर पूर्व की शिक्षा पूरी की।

उच्च शिक्षा के लिए वे नांदेड़ आए। संयोगवश उनके पिता का स्थानांतरण भी उसी समय नांदेड़ हो गया। यहाँ उन्होंने पीपल्स कॉलेज, नांदेड़ से हिंदी विषय में एम.ए. किया। यह महाविद्यालय मराठवाड़ा का पहला महाविद्यालय माना जाता है तथा भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव भी इसी संस्थान के विद्यार्थी रहे थे।

उन्होंने "नागार्जुन के काव्य में व्यंग्य का अनुशीलन" विषय पर शोध कार्य किया और स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा विश्वविद्यालय, नांदेड़ से अप्रैल 2007 में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की।

इसके अतिरिक्त उन्होंने दिसंबर 2005 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा आयोजित NET परीक्षा भी उत्तीर्ण की।

वैवाहिक जीवन

डॉ. सुनील जाधव का विवाह 24 अप्रैल 2008 को राम नगर टांडा में संपन्न हुआ।

उनकी पत्नी श्रीमती वैशाली जाधव, जिला बीड़ के माजलगांव के शिक्षा अधिकारी श्री परशुराम राठोड़ की तृतीय पुत्री हैं। वे स्वयं भी उच्च शिक्षित हैं।

दंपति को दो संतानों का सुख प्राप्त है—

  • कु. तनिष्का
  • तन्मय

अध्यापन एवं व्यावसायिक जीवन

डॉ. सुनील जाधव पिछले 26 वर्षों से हिंदी भाषा एवं साहित्य के अध्यापन से जुड़े हुए हैं।

वे वर्तमान में—

  • यशवंत महाविद्यालय, नांदेड़ के हिंदी विभाग में प्राध्यापक हैं।
  • वर्ष 2015 से अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘शोध-ऋतु’ के प्रधान संपादक के रूप में कार्यरत हैं।

उन्होंने अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठियों में शोधपत्र प्रस्तुत किए हैं तथा देश-विदेश के विद्यार्थियों और शोधार्थियों का मार्गदर्शन भी किया है।

साहित्यिक परिचय

डॉ. सुनील जाधव बहुआयामी साहित्यकार हैं। उन्होंने हिंदी साहित्य की लगभग सभी प्रमुख विधाओं में लेखन किया है।

1. कविता संग्रह

  • मैं बंजारा हूँ
  • रौशनी की ओर बढ़ते कदम
  • सच बोलने की सज़ा
  • त्रिधारा
  • मेरे भीतर मैं

2. कहानी संग्रह

  • मैं भी इंसान हूँ
  • एक कहानी ऐसी भी
  • गोधड़ी

3. उपन्यास

  • गोठण (अनुवाद)

4. शोध एवं समीक्षा ग्रंथ

  • नागार्जुन के काव्य में व्यंग्य
  • हिंदी साहित्य : विविध आयाम
  • हिंदी साहित्य : दलित विमर्श
  • गद्य विविधा : एक समीक्षा
  • अंतरजाल की दुनिया
  • नागार्जुन के काव्य में व्यंग्य का अनुशीलन (शोध ग्रंथ)

5. नाटक

  • सच का एक टुकड़ा (अनुवाद)
  • बंद शहर बंद दरवाजे
  • ब्रह्मकमल

6. एकांकी

  • भ्रूण (मूल रचना, मराठी एवं कन्नड़ अनुवाद सहित)
  • एक निष्ठावान सैनिक
  • कैंची और बंदूक
  • अमरबेल और अन्य एकांकी (संग्रह)

7. व्यंग्य

  • व्यंग्य संग्रह

8. सम्पादित पुस्तकें

  • रत्नकुमार सांभरिया के नाटक : अपनी-अपनी दृष्टि
  • नई कलम

9. समिश्र विधा

  • मेरी चर्चित रचनाएं
    (कविता, कहानी, एकांकी एवं व्यंग्य का चयन)

संपादन कार्य

डॉ. सुनील जाधव वर्ष 2015 से अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘शोध-ऋतु’ का संपादन कर रहे हैं। इस पत्रिका के माध्यम से उन्होंने देश-विदेश के शोधकर्ताओं, अध्यापकों एवं विद्यार्थियों को शोध प्रकाशन का एक महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराया है।

शोध एवं अकादमिक योगदान

  • 100 से अधिक शोध आलेख एवं साहित्यिक लेख प्रकाशित।
  • हिंदी साहित्य, दलित विमर्श, व्यंग्य साहित्य एवं समकालीन साहित्य पर विशेष कार्य।
  • अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठियों में सहभागिता।
  • शोध निर्देशन एवं साहित्यिक व्याख्यान।

अंतरराष्ट्रीय सहभागिता

डॉ. सुनील जाधव ने 10 देशों में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलनों में वक्ता के रूप में सहभागिता की है तथा विभिन्न मंचों पर सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त किए हैं।

प्रमुख पुरस्कार एवं सम्मान

डॉ. सुनील जाधव को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए हैं। प्रमुख पुरस्कार निम्नलिखित हैं—

  1. विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरिशस (2013) द्वारा कविता "मैं वर्ण और वर्णनातीत" के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रथम पुरस्कार।
  2. विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरिशस (2017) द्वारा एकांकी "कैंची और बंदूक" के लिए अंतरराष्ट्रीय तृतीय पुरस्कार।
  3. हिंदी मिलाप, हैदराबाद (2019) राष्ट्रीय कविता प्रतियोगिता में द्वितीय पुरस्कार।
  4. रचनाकार नाटक लेखन पुरस्कार (2020)
  5. मुंशी प्रेमचंद रजत महाराष्ट्र हिंदी साहित्य अकादमी पुरस्कार (2021–22) — कहानी संग्रह "गोधड़ी" के लिए।
  6. इसके अतिरिक्त 25 से अधिक राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त।

साहित्य की विशेषताएँ

डॉ. सुनील जाधव का साहित्य सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदनाओं, दलित विमर्श, बंजारा समाज की संस्कृति, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा समकालीन यथार्थ का सशक्त दस्तावेज है। उनकी रचनाओं में समाज के वंचित, शोषित और उपेक्षित वर्गों की पीड़ा के साथ-साथ संघर्ष, आत्मसम्मान और परिवर्तन की आकांक्षा स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

उनकी भाषा सरल, प्रभावशाली, संवेदनशील तथा जनसामान्य के निकट है। कविता से लेकर नाटक और शोध-समीक्षा तक प्रत्येक विधा में उन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है।

डॉ. सुनील जाधव का साहित्यिक योगदान

  • हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं में महत्वपूर्ण लेखन।
  • बंजारा समाज एवं दलित साहित्य को नई पहचान देने का प्रयास।
  • राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी भाषा का प्रतिनिधित्व।
  • शोध एवं आलोचना साहित्य को समृद्ध करने में उल्लेखनीय योगदान।
  • नई पीढ़ी के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों का मार्गदर्शन।
  • अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका के सफल संपादक के रूप में साहित्यिक सेवा।

निष्कर्ष

डॉ. सुनील गुलाबसिंग जाधव समकालीन हिंदी साहित्य के उन बहुआयामी रचनाकारों में शामिल हैं जिन्होंने कविता, कहानी, नाटक, एकांकी, शोध, समीक्षा, अनुवाद और संपादन जैसे विविध क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य किया है। एक सफल शिक्षक, कुशल संपादक, गंभीर शोधकर्ता और संवेदनशील साहित्यकार के रूप में उन्होंने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त सम्मान उनके साहित्यिक अवदान की पुष्टि करते हैं। उनका संपूर्ण साहित्य समाज में समानता, मानवीय मूल्यों, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों

डॉ. सुनील गुलाबसिंग जाधव हिंदी के प्रतिष्ठित साहित्यकार, कवि, कथाकार, नाटककार, शोधकर्ता, संपादक एवं शिक्षाविद् हैं। उन्होंने कविता, कहानी, नाटक, एकांकी, शोध-समीक्षा और संपादन सहित अनेक साहित्यिक विधाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उनका वास्तविक जन्म 9 सितंबर 1978 को महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले की मुदखेड़ तहसील स्थित दुर्गा नगर टांडा में हुआ। शैक्षणिक अभिलेखों में उनकी जन्मतिथि 1 सितंबर 1978 दर्ज है।

उनकी प्रमुख कृतियों में मैं बंजारा हूँ, रौशनी की ओर बढ़ते कदम, सच बोलने की सज़ा, त्रिधारा, मेरे भीतर मैं, मैं भी इंसान हूँ, गोधड़ी, बंद शहर बंद दरवाजे, ब्रह्मकमल, भ्रूण, कैंची और बंदूक तथा नागार्जुन के काव्य में व्यंग्य जैसी पुस्तकें शामिल हैं।

उन्हें विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरिशस द्वारा अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार, हिंदी मिलाप-हैदराबाद राष्ट्रीय कविता पुरस्कार, रचनाकार नाटक लेखन पुरस्कार, मुंशी प्रेमचंद रजत महाराष्ट्र हिंदी साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित 25 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं।

वे यशवंत महाविद्यालय, नांदेड़ के हिंदी विभाग में प्राध्यापक हैं तथा वर्ष 2015 से अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका 'शोध-ऋतु' के संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा विश्वविद्यालय, नांदेड़ से "नागार्जुन के काव्य में व्यंग्य का अनुशीलन" विषय पर पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की तथा दिसंबर 2005 में यूजीसी-नेट परीक्षा उत्तीर्ण की।

उन्होंने कविता, कहानी, नाटक, एकांकी, शोध, समीक्षा, अनुवाद और संपादन के माध्यम से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। उनके 100 से अधिक शोध एवं साहित्यिक आलेख प्रकाशित हो चुके हैं तथा वे 10 देशों के अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलनों में वक्ता के रूप में भाग ले चुके हैं।

आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

पसंद पसंद 0
नापसंद नापसंद 0
स्नेह स्नेह 0
मज़ेदार मज़ेदार 0
वाह-वाह वाह-वाह 1
दुखी दुखी 0
गुस्सा गुस्सा 0

टिप्पणियाँ (0)

User