गणेश करमठोट (गणेश किसन राठोड) जीवन परिचय लेखक एवं समाजसेवी

गणेश करमठोट (गणेश किसन राठोड) गोरमाटी (बंजारा) भाषा के प्रमुख लेखक, कवि, प्रकाशक, समाजसेवी और विज्ञान विषय के सहायक शिक्षक हैं। उन्होंने वर्ष 2019 में दमाळ प्रकाशन की स्थापना कर गोरमाटी भाषा के लेखकों को मंच प्रदान किया तथा अनेक पुस्तकों को ISBN दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी पहली पुस्तक 'वचारी' गोरमाटी भाषा की पहली ISBN प्राप्त पुस्तक मानी जाती है। वे गोरमाटी भाषा गौरव दिवस के आयोजन, भाषा संरक्षण, साहित्य प्रसार, वाचन संस्कृति के विकास तथा गोरमाटी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में गोरमाटी साहित्य के प्रचार-प्रसार और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उनका योगदान उन्हें बंजारा समाज के प्रमुख साहित्यकारों और भाषा आंदोलन के अग्रणी व्यक्तित्वों में स्थापित करता है।

Jul 18, 2026 - 17:41
अद्यतन: 23 days ago
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गणेश करमठोट (गणेश किसन राठोड) जीवन परिचय लेखक एवं समाजसेवी

गणेश करमठोट, जिनका वास्तविक नाम गणेश किसन राठोड है, गोरमाटी (बंजारा) भाषा के प्रमुख लेखक, कवि, प्रकाशक, शिक्षक और समाजसेवी हैं। उन्होंने गोरमाटी भाषा को साहित्यिक पहचान दिलाने, लेखकों को प्रोत्साहित करने, पुस्तकों को ISBN उपलब्ध कराने तथा भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के उद्देश्य से निरंतर कार्य किया है।

वे शिक्षा के क्षेत्र में विज्ञान विषय के सहायक शिक्षक होने के साथ-साथ सामाजिक एवं साहित्यिक आंदोलन के सक्रिय कार्यकर्ता भी हैं। उनकी स्थापना "दमाळ प्रकाशन" आज गोरमाटी भाषा में सर्वाधिक ISBN पुस्तकों का प्रकाशन करने वाली संस्था के रूप में जानी जाती है।

व्यक्तिगत परिचय

  • पूरा नाम: गणेश किसन राठोड
  • लोकप्रिय नाम: गणेश करमठोट
  • पिता का नाम: किसन मन्सू राठोड
  • माता का नाम: यशोदाबाई किसन राठोड
  • जन्म तिथि: 4 जुलाई 1989
  • स्थायी पता: मु. पोरीयानगरी, वार्ड क्रमांक 1, जिवती, जिला चंद्रपुर, महाराष्ट्र – 442908
  • व्यवसाय: सहायक शिक्षक (विज्ञान विषय)
  • शैक्षणिक योग्यता: एम.ए. (समाजशास्त्र), डी.एड.
  • मोबाइल: 9890221577
  • ईमेल: ganeshrathode131@gmail.com

प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा

गणेश करमठोट का जन्म 4 जुलाई 1989 को महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में हुआ। बचपन से ही उन्हें शिक्षा, समाज सेवा और अपनी मातृभाषा गोरमाटी के प्रति विशेष लगाव था। उच्च शिक्षा के दौरान उन्होंने समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर (एम.ए.) तथा डी.एड. की उपाधि प्राप्त की। शिक्षक बनने के बाद भी उन्होंने केवल विद्यालय तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज और भाषा के विकास को अपना जीवन लक्ष्य बनाया।

साहित्यिक एवं सामाजिक यात्रा

गणेश करमठोट ने गोरमाटी भाषा को साहित्यिक पहचान दिलाने के उद्देश्य से एक व्यापक अभियान प्रारंभ किया। उन्होंने लेखकों, कवियों और साहित्यकारों को संगठित किया तथा उन्हें अपनी मातृभाषा में लेखन के लिए प्रेरित किया।

उनका मानना है कि किसी भी भाषा का विकास तभी संभव है जब उसमें गुणवत्तापूर्ण साहित्य उपलब्ध हो। इसी सोच के साथ उन्होंने गोरमाटी भाषा के लेखकों की पुस्तकों को ISBN दिलाने का कार्य शुरू किया, जिससे उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने लगी।

संस्थागत जिम्मेदारियाँ

गणेश करमठोट अनेक महत्वपूर्ण संस्थाओं से जुड़े हुए हैं और विभिन्न पदों पर कार्य कर रहे हैं।

  • संचालक: दमाळ प्रकाशन, चंद्रपुर (गोरमाटी भाषा में सर्वाधिक ISBN पुस्तकें प्रकाशित करने वाली संस्था)
  • समिति सदस्य: गोरमाटी भाषा गौरव दिवस समिति
  • ट्रस्टी: महेश चंद बंजारा मेमोरियल ट्रस्ट
  • सहसचिव: भारतीय बंजारा समाज कर्मचारी सेवा संस्था, महाराष्ट्र राज्य

प्रकाशित पुस्तकें एवं साहित्यिक कृतियाँ

लेखक, संपादक और कवि के रूप में गणेश करमठोट ने अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकों का प्रकाशन एवं संपादन किया है।

  1. वचारी – गोरमाटी भाषा की पहली ISBN प्राप्त पुस्तक
  2. कोतळो
  3. पंणो नकता
  4. गोरमाटी भाषा आकसेर
  5. मंदळा गीदेर पीवसी (कविता संग्रह)
  6. गोरमाटी भास्या गवरव
  7. गोरमाटी भाषा और साहित्य
  8. आरोळी विशेषांक
  9. मांडवस दाड दकाळणी (दिनदर्शिका)

इन पुस्तकों ने गोरमाटी भाषा के साहित्य को नई दिशा प्रदान की है और अनेक नए लेखकों को प्रेरित किया है।

कार्य यात्रा (Timeline)

वर्ष 2012–2017

उन्होंने विभिन्न तांडों में जाकर समाज जागरूकता एवं वैचारिक प्रबोधन का कार्य प्रारंभ किया। इस अवधि में उन्होंने शिक्षा, भाषा और सामाजिक एकता पर विशेष ध्यान दिया।

वर्ष 2018

गोरमाटी भाषा की पुस्तकों के विक्रय और वितरण का अभियान शुरू किया, जिससे साहित्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचने लगा।

वर्ष 2019

उन्होंने "दमाळ प्रकाशन" की स्थापना की, जो आगे चलकर गोरमाटी भाषा की प्रमुख प्रकाशन संस्था बनी।

वर्ष 2020

उनकी पहली पुस्तक "वचारी" प्रकाशित हुई, जिसे गोरमाटी भाषा की पहली ISBN प्राप्त पुस्तक माना जाता है। इसी वर्ष उन्होंने "गोरमाटी भाषा गौरव दिवस" मनाने की परंपरा की भी शुरुआत की।

वर्ष 2022

उन्होंने गोरमाटी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने हेतु शासन स्तर पर लगातार पत्राचार और प्रयास प्रारंभ किए।

वर्ष 2024

भीमणीपुत्र मोहन नायक के जन्मदिवस पर लेखक एवं कवियों का सम्मान समारोह आयोजित कर भाषा और साहित्य को सामाजिक मान्यता दिलाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।

दमाळ प्रकाशन की स्थापना

वर्ष 2019 में स्थापित दमाळ प्रकाशन आज गोरमाटी भाषा में सर्वाधिक ISBN पुस्तकों का प्रकाशन करने वाली संस्था के रूप में प्रसिद्ध है।

इस संस्था का उद्देश्य केवल पुस्तकें प्रकाशित करना नहीं, बल्कि—

  • नए लेखकों को मंच देना,
  • पुस्तकों को ISBN उपलब्ध कराना,
  • भाषा का संरक्षण करना,
  • साहित्य को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाना,
  • समाज में पढ़ने की संस्कृति विकसित करना है।

आज अनेक लेखक इस संस्था के माध्यम से अपनी पुस्तकों का प्रकाशन कर चुके हैं।

गोरमाटी भाषा गौरव दिवस

गणेश करमठोट द्वारा प्रारंभ किया गया गोरमाटी भाषा गौरव दिवस प्रत्येक वर्ष 2 अप्रैल, भीमणीपुत्र मोहन नायक के जन्मदिवस पर मनाया जाता है।

इस अवसर पर साहित्यकारों, कवियों, लेखकों एवं समाजसेवियों का सम्मान किया जाता है तथा भाषा संरक्षण पर विचार-विमर्श होता है।

गौरव दिवस का यात्रा क्रम

वर्ष स्थान जिला
2020–2022 चिंचखेड, तहसील किनवट नांदेड़
2023 गडचांदूर चंद्रपुर
2024 सारखाणी, तहसील किनवट नांदेड़
2025 सींगोडा – भिकू नाईक तांडा नांदेड़
2026 पंदरवाडा (ऑनलाइन आभासी सभा) डिजिटल

प्रमुख उपलब्धियाँ

भाषा संरक्षण

गणेश करमठोट लगातार गोरमाटी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए शासन स्तर पर पत्राचार और जनजागरण अभियान चला रहे हैं।

ISBN आंदोलन

उन्होंने गोरमाटी भाषा के अनेक लेखकों की पुस्तकों को ISBN दिलाकर उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।

वाचन संस्कृति का विकास

उन्होंने महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों में गोरमाटी साहित्य का प्रचार-प्रसार किया तथा पुस्तकालयों की स्थापना के लिए प्रेरित किया।

ठाणू नायक चौक की स्थापना

उनके प्रयासों से महाराष्ट्र राज्य का पहला "ठाणू नायक चौक" गडचांदूर (जिला चंद्रपुर) में स्थापित किया गया, जो समाज के इतिहास और गौरव का प्रतीक माना जाता है।

साहित्यकारों का सम्मान

वे समय-समय पर गोरमाटी भाषा के लेखक, कवि और साहित्यकारों का सम्मान कर उन्हें नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।

सामाजिक आंदोलन

गणेश करमठोट केवल साहित्यकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलनों, जनजागरण अभियानों, धरनों और उपोषणों में भी सक्रिय भागीदारी निभाते रहे हैं। उनका उद्देश्य समाज में स्वाभिमान, शिक्षा, भाषा और सांस्कृतिक चेतना का विकास करना है।

सामाजिक योगदान

गणेश करमठोट ने समाज के लिए अनेक उल्लेखनीय कार्य किए हैं—

  • गोरमाटी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने का सतत प्रयास।
  • गोरमाटी भाषा के साहित्य को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना।
  • लेखकों और कवियों को मंच उपलब्ध कराना।
  • पुस्तकों को ISBN दिलाकर वैश्विक पहचान दिलाना।
  • तांडों में वैचारिक जागरण अभियान चलाना।
  • विभिन्न राज्यों में पुस्तकालय निर्माण और वाचन संस्कृति को बढ़ावा देना।
  • समाज के युवाओं को अपनी मातृभाषा में लेखन के लिए प्रेरित करना।
  • लेखक-कवियों को सम्मानित कर साहित्यिक वातावरण तैयार करना।

निष्कर्ष

गणेश किसन राठोड (गणेश करमठोट) केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि गोरमाटी (बंजारा) भाषा के समर्पित लेखक, कवि, प्रकाशक, समाजसेवी और भाषा आंदोलन के अग्रणी कार्यकर्ता हैं। उन्होंने साहित्य, संगठन और सामाजिक चेतना को एक साथ जोड़ते हुए गोरमाटी भाषा के संरक्षण और विकास के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया है।

उनकी स्थापना "दमाळ प्रकाशन" आज गोरमाटी भाषा के साहित्यिक विकास का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुकी है। लेखकों को ISBN उपलब्ध कराना, गोरमाटी भाषा गौरव दिवस की शुरुआत करना, विभिन्न राज्यों में साहित्य का प्रसार करना, पुस्तकालयों की स्थापना के लिए प्रेरित करना तथा भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए सतत प्रयास करना—ये सभी कार्य उनके जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हैं।

उनकी लेखनी, संगठन क्षमता और सामाजिक समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने यह सिद्ध किया है कि मातृभाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास, दूरदृष्टि और समर्पण ही किसी समाज की वास्तविक शक्ति होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों

गणेश करमठोट (गणेश किसन राठोड) गोरमाटी (बंजारा) भाषा के प्रसिद्ध लेखक, कवि, प्रकाशक, समाजसेवी और सहायक शिक्षक हैं। वे गोरमाटी भाषा के संरक्षण एवं साहित्यिक विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।

गणेश करमठोट का वास्तविक नाम गणेश किसन राठोड है।

दमाळ प्रकाशन, चंद्रपुर स्थित एक प्रकाशन संस्था है जिसकी स्थापना गणेश करमठोट ने वर्ष 2019 में की। यह गोरमाटी भाषा में सर्वाधिक ISBN पुस्तकों का प्रकाशन करने वाली प्रमुख संस्था मानी जाती है।

उनकी प्रमुख पुस्तकों में वचारी, कोतळो, पंणो नकता, गोरमाटी भाषा आकसेर, मंदळा गीदेर पीवसी, गोरमाटी भास्या गवरव, गोरमाटी भाषा और साहित्य, आरोळी विशेषांक तथा मांडवस दाड दकाळणी शामिल हैं।

'वचारी' वर्ष 2020 में प्रकाशित गोरमाटी भाषा की पहली ISBN प्राप्त पुस्तक मानी जाती है, जिसने गोरमाटी साहित्य को नई पहचान दिलाई।

गोरमाटी भाषा गौरव दिवस प्रत्येक वर्ष 2 अप्रैल को भीमणीपुत्र मोहन नायक की जयंती पर मनाया जाता है। इसका उद्देश्य गोरमाटी भाषा, साहित्य और संस्कृति का संरक्षण तथा साहित्यकारों का सम्मान करना है।

उन्होंने गोरमाटी भाषा के लेखकों को प्रोत्साहित किया, पुस्तकों को ISBN दिलाने में सहयोग किया, साहित्य का विभिन्न राज्यों में प्रचार-प्रसार किया तथा भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए लगातार प्रयास किए।

वे दमाळ प्रकाशन के संचालक, गोरमाटी भाषा गौरव दिवस समिति के सदस्य, महेश चंद बंजारा मेमोरियल ट्रस्ट के ट्रस्टी तथा भारतीय बंजारा समाज कर्मचारी सेवा संस्था, महाराष्ट्र राज्य के सहसचिव हैं।

वे महाराष्ट्र में विज्ञान विषय के सहायक शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं तथा शिक्षा के साथ-साथ साहित्य और समाज सेवा में सक्रिय हैं।

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टिप्पणियाँ (1)

User
बाबुसिंग राठोड
बाबुसिंग राठोड 1 महीना ago
प्रिय भाई गणेश, गोर बोलीभाषा को संविधान की आठवी सुची में दर्ज कराने के आपके प्रयास की मैं सराहना करता हूॅं! आपकी संस्था "दमाळ प्रकाशन" आनेवाले समय में गोरमाटी बोलीभाषा का प्रमुख केंद्र बने, ईस शुभकामना के साथ आपको बहुत बहुत बधाई!